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रविवार, 8 फ़रवरी 2015

'बंधन'



तुमने तोड़े सारे ही बंधन,
बंधन बांधे थे जो तुमने मैंने सारे ही,
तुमने तोड़े सारे ही बंधन


बंधन बांधा था जो
आस का........
बंधन था जो विश्वास का,अहसास का....
बंधन था बांधा जो श्वास का....
तुमने तोड़े सारे ही बंधन,
बंधन बांधे थे जो तुमने मैंने सारे ही,
तुमने तोड़े सारे ही बंधन।

बंधन था जो प्यार का
जीत का,हार का...
बंधन बांधा था जो संसार का..
बंधन बांधे थे जो तुमने मैंने हाथ के,
चलने को जो साथ के,
तुमने तोड़े सारे ही बंधन,
बंधन बांधे थे जो तुमने मैंने सारे ही,
तुमने तोड़े सारे ही बंधन।

बंधन था जो
कल और आज का
बंधन था जो साज का आवाज का...
नए क्षितिज को..नई परवाज का..
तुमने तोड़े सारे ही बंधन,
बंधन बांधे थे जो तुमने मैंने सारे ही,
तुमने तोड़े सारे ही बंधन।

बंधन थे जो
दिन और रात के..
बिछड़ने के....मुलाक़ात के
बंधन थे जो बिन बात के
सारे ही बांधे थे जो
तुमने-मैंने मैंने-तुमने
तुमने तोड़े सारे ही बंधन।

बंधन थे.......सो टूट गए
सारे ही, छुट गये
प्राण बंधा है कभी बंधन में?
प्रेम में होता नही कोई बंधन
शीश झुकाए तुमको करता मै नमन
जो तुमने तोड़े सारे ही बंधन।


                        -कृष्णा मिश्रा 
                       

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