Google+ Followers

गुरुवार, 2 अप्रैल 2015

मै तो बलिहारी...




मै तो बलिहारी,अमीर हो गया
इश्क़ में रब्बा फकीर हो गया

***

मेरे रांझे का मुझे पता नही
बिन देखे ही मै तो हीर हो गया

**

उसके जलवे यूँ सुने कमाल के
दिलको किस्सा उसका तीर हो गया

***
शिवशिवा घट-घट मुझे पिलाओ अब
तिश्न मै वो गंग नीर हो गया

**

उसको पहनूं धो सुखाऊँ रोज मै
लाज मेरी अब वो चीर हो गया

***

गाऊँ कलमा मै सुनाऊँ दर-ब-दर
‘’जान’’ज्यूँ मै कोई पीर हो गया



********************************
          (c) ‘जान’ गोरखपुरी
********************************
           ०२ अप्रैल २०१५

योगदानकर्ता