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शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2015

जाइये आपका...







जाइये आपका एतबार हम नही करते...
संगदिलो से प्यार हम नही करते।



अब जो बेरुखी है,तो निभाइए शौक से...
वख्त देखकर प्यार हम नही करते।



‘‘इश्क़ है इश्क़’’ है तो हमेशा रहेगा...
आज नगद कल उधार हम नही करते।



शतरंज की बाजी की तरह,तुमने चलाये है रिश्तें
माफ़ कीजिये,रिश्तो में कारोबार हम नही करते।



मेरे हिस्से की वफ़ा भी बरसेगी एक दिन...
बेमौसम बादलों का इंतज़ार हम नही करते।

                         
                                -जान

                             २० फरवरी २०१५

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