ऑटोग्राफ
आज सुबह जैसे ही मैंने,
दरवाजा खोला : ऑटोग्राफ के लिए
एक बच्चा हाथ उठाये खड़ा था -
मन ही मन गदगद होकर,
मैंने तुरंत जेब से पेन निकाली और
अपना फर्राटेदार हस्ताक्षर दे मारा !
तभी उसने झट से अपना मैला सा
हाथ खींचा और बोला : मुदे ऎ नही ताहिये ।
मैंने कहा : फिर क्या चाहिए ?
वह बोला ; पैछै (पैसे ) !!
यह सुनते ही मै धरातल पर आ गया !!
और कुछ देर तक उसका चेहरा ही देखता रहा
फिर भारी मन से मैं बोला;
बेटा! 'पैसे तो नही हैं,पर तुम यह पेन रख लो !ये बहुत कीमती है ।
मेरे हाथ से पेन लेकर,उसने उस ३ रूपये की कलम को
चारों तरफ से घुमा-घुमाकर देखा,
फिर कुछ देर तक मुझे घूरता रहा,इस बीच मै
अपने गंतव्य की ओर जाने को बढ़ा ही था कि. पीछे से आवाज़ आई;
लुकिए !!
जैसे ही मै पीछे मुड़ा : उसने १० की नोट मेरी और बढ़ा दिया ।
यह मेरे स्वाभिमान को सीधे तौर पे चुनौती थी,
इतने में वह मुस्कुराता हुआ,मेरी दी हुई पेन को मेरी ओर बढ़ाते हुये,
फ़िल्मी अंदाज मे बोला; आतोग्लाफ पिलीद!! ।
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---कृष्णा मिश्रा
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