Google+ Followers

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

''लालीपॉप''














लालीपॉप
दो तरह के होते है-
एक खाने वाला
और दूसरा देने वाला..
खाने वाले के
बारे में हम सभी परिचित है,
और देने वाले से
भी हम जाने-अनजाने में ही सही पर
अच्छी तरह से परिचित है...
मेरा आशय आप आगे की पंक्तियों
में समझ जायेंगे..

लालीपॉप देने की शुरुवात
हमारे जन्म से ही शुरू हो जाती है
जब माँ अपने स्तन का
झासां देकर धीरे से निप्पल-बोटल
बच्चे के मुह में लगा देती है,
अब आदमी की सहूलियत अपनी जगह है,
और आजकल की फास्टफूड और
मिलावट भरी की जिंदगी में
माँ को दूध उतरना भी
एक अचीवमेंट से कम नही है..
माँ का दूध जिस बच्चे को
नसीब हो गया वह खुद को
परम सौभाग्यशाली समझे,
और माँ स्वयं को धन्य!

हाथों का पालना-रूपी
लालीपॉप देकर
हम बच्चे के सोते ही
धीरे से उसे फिर बिस्तर
के हवाले कर देते है,
थोड़े बड़े होने पर,
एग्जाम में अच्छे मार्क
लाने के लिए
हम बच्चे को साइकिल,
मोबाइल,लैपटॉप,बाइक
इत्यादी का लालीपॉप देते रहते हैं
जिसमे से कुछ लालीपॉप
पूरे होते है,कुछ नही।



हम अपनी माशूक को
न जाने कितने और कैसे-कैसे
लालीपॉप देते रहते है,इसका कहना ही क्या...
इस संदर्भ में सबसे पॉपुलर
चाँद-तारे तोड़ने का जो लालीपॉप
है का जिक्र अगर मैंने नही किया
तो यह ‘’लालीपॉप टॉपिक’’
अधूरा ही कहलायेगा!
माशूक से आगे बढ़ते है तो,
मेरा मानना ये है की
गृहस्थ जीवन में रह रहे व्यक्ति को
अपनी बीवी को
रोज नए प्रकार का लालीपॉप देने में
पारंगत होना अनिवार्य है,
बल्कि मै तो कहता हूँ कि..
शादी से पहले इसका आल इण्डिया लेवल पर
एलेगिबिलिटी टेस्ट होना चाहिए..
जो पास हो उसी को शादी की परमीशन
मिले वर्ना कुंवारा रहे!



आजकल लालीपॉप से संबंधित
एक और चिंता का विषय है--
जो लगातार अपना कद बढाता जा रहा है
जिसे मैं नाम दूँगा..
‘’लालीपॉप संस्कृति’’ जो पश्चिम से चलकर
अब इस तरह से हमारे परिवेश में घुल गयी है कि
हमारी वर्तमान नस्लें
विकृत मानसिकता का शिकार हो रही है,
जिसका परिणाम,
छोटी-छोटी २-३ साल की
बच्चियों के साथ बलात्कार,
चोरी,नशाखोरी,हत्या,
और तरह तरह क्रिमिनल गतिविधियों
में किशोरों की लिप्तता
के रूप में सामने आ रहा है।
पिछले दशक से इस ग्राफ में अभूतपूर्व वृद्धि हुयी है,
मोबाइल,इन्टरनेट,की पहुँच ने इसे
बढ़ावा तो दिया ही है,हमारे यहाँ के गणमान्य लोग
भी कम जिम्मेदार नही है...
फिल्मो का स्तर इतना दोयम हो गया है कि
पूछिए मत..सब अपनी रोटी सेंकने में लगे हैं...
अब जहा ‘’रोस्ट’’ के होस्ट
पैसों के लिए कुछ भी कर सकते है
कितना भी नीचे गिर सकते है...
वहीँ अगर आप देखेंगे कि
इस समय बालीवुड का सबसे महगां सबसे हिट
और पॉपुलर सिंगर कभी बेहद ही फूहड़ और अश्लील
गाने गानेवाला गायक है..जिसके साथ आज बालीवुड
के दिग्गज थिरकते नजर आते है..
सनी लियोन ने तो नायिका की
नई परिभाषा ही लिख दी है..
पवन सिंह के ‘’लालिपॉप’’ ने तो
‘’लालिपॉप संस्कृति’’ को
गाँव-देहात तक पहुँचा दिया है..
भोजपुरी के दोयम दर्जे के सिंगरों ने ‘’लालीपॉप संस्कृति’’
के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है!



अगर व्यक्ति लालीपॉप देने की कला
में माहिर हो गया,तो समझ लीजिये उसे
स्वर्ग इसी पृथ्वी पे मिल गया..
जिसके साक्षात् उदाहरण
हमारे देश के नेता-बिरादरी के लोग हैं!
अब यूपी में जहाँ लैपटॉप,बेरोजगारी-भत्ता रुपी
लालीपॉप ने सपा सरकार को फिर से सिंघासन दिया,
वहीँ कालेधन,महगाई से मुक्ति
और विकास के लालीपॉप
ने मोदी सरकार के गठन में
सबसे मुख्य भूमिका अदा की..
हालहीं में दिल्ली में वाई-फाई
मुफ्त बिजली-पानी आदि के
लालीपॉप का चमत्कार आप देख ही चुके है।
माना कि इनमे से कई
लालीपॉप टाइप सपने पूरे भी हुए है...
वास्तव में लालीपॉप के फार्मूले का
सबसे मुख्य तत्व यही है कि..
छोटे-छोटे लालीपॉप के सपने
पूरे भी होने चाहिए..ताकि जनता
यानी की हम सबका लालीपॉप पर
विश्वास अनवरत बना रहे।


दुनिया का सबसे प्राचीन-पुराना
और सबसे सदाबहार
लालीपॉप है ‘’रोटी-कपड़ा और मकान’’
जिसके दम पर कांग्रेस ने पूरे
65 वर्षो से अधिक समय तक
भारत पर राज किया ..
और हाय! रे फूटी किस्मत
फिर भी ये लालीपॉप लालीपॉप ही रहा!
आजकल ये थोडा हाईटेक हो गया है अब
बिजली और पानी को भी अपनी श्रेणी
में ये शामिल करता है।



‘’आलवेज थिंक पॉजिटिव’’
ये आधुनिक युग का लालीपॉप है,
जिसके दम पर जाने कितने 2 नम्बर के
बाबाओं का कारोबार फलफूल रहा है..
जिसके समय-समय पर
उदाहरण हमारे सामने आते रहते है..
रामपाल इसकी ताजा बानगी हैं,
इतना सबकुछ होने के बावजूद
टीवी पर इस तरह के कईयों
के दर्शन रोज ही हो जाते है...
कोई कुछ करता क्यों नही?
ये भी उन बाबाओं द्वारा दिए गए
लालीपॉप का ही कमाल है..
जो कुछ करने में समर्थ
लोगों के तत्काल कोटे में जाता है!
अब ऐसा भी क्या ‘’थिंक पॉजिटिव’’
के हर चीज पर अंधविश्वास कर लिया जाये!







आजकल लालीपॉप का चलन
बिजनेस में कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है..
छोटी से लेकर बड़ी से बड़ी कंपनिया
लगभग हर उत्पाद को ‘’लालीपॉप’’ के साथ
उतार रही है ..और इन लालीपॉपों में अकसर
सबसे घटिया सामग्री बेचीं जा रही है...
और ऐसी ऐसी स्कीम है की अच्छे-अच्छे
जागरूक इन्सान भी फंस जाये...
फिर तो आम उपभोक्ता का कहना ही क्या..
वह तो एक दिन में करोड़पति बनने के लालीपॉप
को भी कैश करने में भी विश्वास रखता है!
‘’50 रूपये के चूरन में बनिए करोड़पति’’
फ्री के लाइटर के साथ पाइए फ़्रिज,मोटरसाइकिल,कार
बस आपको स्क्रेच करना है,500 रूपये का कूपन।
इनाम की गारंटी,इनाम न निकलने पे पैसे वापस.
क्या साहेब...क्या क्या बताये, और क्या न बताये
अब तो लगभग रोज के ही
अखबार में निकलता है कि....
‘’लक्की ड्रा’’ के लालीपॉप के नाम पे
इतनी राशी का चूना लगाया..
ई-मेल में लाखों रूपये जीतने का
लालीपॉप तो अब आम बात
हो चुकी है पर फिर भी लोग ऐसे
लालीपॉप में फँस जाते हैं!
यही तो है  लालीपॉप की महिमा...
जिसका मै गुणगान कर रहा हूँ..
और बहुत कुछ बाकि है कहने को..
पर फिर कभी।
वैसे एक बात तो सच है जिन्दा रहने के लिए
लालीपॉप का होना बहुत जरूरी है..
आखिर ये भी एक लालीपॉप ही तो है कि...
कभी न कभी उजाला मिटा देगा अँधेरे को हमेशा के लिए!



                                   -‘’कृष्णा मिश्रा’’

                                   २३ फरवरी २०१५

योगदानकर्ता