मंगलवार, 10 मार्च 2015

बला-ए-इश्क़...

  





कुम्हलाए हम तो जैसे सजर से पात झड़ जायें
यु दिल वीरां कि बिन तेरे, चमन कोई उजड़ जायें


मिरी आव़ाज में है अब चहक उसके आ जाने की
सितारों आ गले लूँ लगा,कि हम तुम अब बिछड़ जायें


कि बरसों बाद मिलके आज छोड़ो शर्म एहतियात
लबों से कह य दो के अब, लबों से आके लड़ जायें


न मारे मौत ना जींस्त उबारे या ख़ुदा खैराँ
बला-ए-इश्क़ पीछे जिस किसी के हाय पड़ जायें


बना डाला ग़मों के साहिलों ने ‘’जान’’ को दरिया
रस्ता पर्वत दिए जाये अगर हम राह अड़ जायें


          




                                  -‘’जान गोरखपुरी’’

                                   07 march 2015

रविवार, 8 मार्च 2015

''अर्धनारीश्वर''



''नारी होना अपने
आप में उपलब्धि है!
स्वयं भगवान शिव
अर्धनारीश्वर है!!
उनका यह रूप प्रमाण है के
नारी अंश नही है केवल उनका !!
बल्कि वे खुद ही नारी रूप में
सृजन करते है
समस्त सृष्टि का''!!








                                        -''कृष्णा मिश्रा''
                                           ०८ मार्च १५
                                       

शनिवार, 7 मार्च 2015

''होली छाप-तिलक''





''लाग लगी फागुन की
रंग कान्हा के हाथ !
जिसकी चुनरी रंग दी
धन धन उसके भाग'' !!



आ सजना फागुन में
चुनर ढाप मै रख लूँ !
न मै रंगू गैर को..
ना तोहे रंगन दूँ..!!





छाप तिलक सब छीनी,मोहे रंगवा लगाईके!
रंगवा लगाइके,मोहे अंगवा लगाइके!!
छाप तिलक सब छीनी,मोहे रंगवा लगाईके!!




प्रेमवटी की गुझिया खिलाईके!
मतवारी कर दीन्ही,मोहे भंगवा मिलाईके!!



गोरी गोरी बइयां,धानी री चुनरियाँ!
बसन्ती कर दीन्ही,मोहे संगवा भिगाईके!!




बल-बल जाऊं मै,तोरे रंगरेजवा!
अपनी सी रंग दीन्ही,मोहे अंगवा लगाईके!!




राधे-श्याम को बल बल जाऊं!
मोहे सुहागन कीन्ही,प्रेम रंगमा डूबाईके!!



                                          -कृष्णा मिश्रा
                                       होली 06 मार्च २०१५
                                   

मंगलवार, 3 मार्च 2015

मै तो तेरा हुआ......




तुमको पा के...
ऐसा लगा के....
सब कुछ पा लिया है...!
मेरे ख़ुदा..
मै तो तेरा हुआ..!
जबसे वो................मेरा हुआ है!!



तेरी गलियाँ..!.....................भा गई मुझको..!!
नजरें जबसे..!......................पा गई तुझको..!!
वल्लाह..!!!
मेरे ख़ुदा..
मै तो तेरा हुआ..!
महबूब को मेरे..............तूने क्या जलवा दिया है.....!!




स....प...ध....म....गा...





शायरी अब तो..!.................आ गई मुझको..!!
लगन वो कोई..!..................लगा गई मुझको..!!
वल्लाह..!!!
मेरे ख़ुदा..
मै तो तेरा हुआ..!
जबसे कानों में..............उसने कुछ कहा है..!!








क्या-क्या अब मै..!................सुनाऊ तुमको..!!
बातें उसकी कैसे..!................बताऊ तुमको..!!

प..मा..म..म...गा..रे....सा.....

वल्लाह..!!!
मेरे ख़ुदा..
मै तो तेरा हुआ..!
जहाँ भी देखूं....................वही दिखता है..!!







आजा इश्क की..!....................भंग पिलाऊ तुझको..!!
रंग में अपने..!.......................भिगाऊ तुझको.!!
वल्लाह..!!!
मेरे ख़ुदा..
मै तो तेरा हुआ..!
तू-ही-तू है महकता................जबसे उसने छुआ है..!!





                  
                                        -‘’कृष्णा मिश्रा’’

                                        ०३ मार्च २०१५

मेनका का आह्वाहन...!!




ये जो आसमां..
रो रहा है इन दिनों
इससे तुम क्यू नही कह देती 
के चुप हो जाये!!
तुम तो मना सकती हो..
हवाए को भी और घटाए को भी!!
मेरे देश का किसान सोया नही है..
पिछले ३-४ दिनों से... 
बार बार टार्च जला 
के यही देखता है..
के इस बार भी साल भर रोना ही पड़ेगा क्या??
अगर तुम मेनका हो 
तो इंद्र को होश में लाओ!!
उसे सुला दो 
अपनी यौवन की मदिरा पिला कर
और दिखा दो के 
विश्वामित्र की तपस्या तोड़ने 
वाली....... तोड़ सकती है इंद्र की मूर्च्छा भी!!



                                             -''कृष्णा मिश्रा''
                                            ३ मार्च २०१५

रविवार, 1 मार्च 2015

‘’मच्छर फ्लू’’

''व्यंग्य''



देश में स्वाइन फ्लू
के कहर के बीच
दुःख-भरी खबर ये है के
बालीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री
सोनम कपूर 
को स्वाइन फ्लू
होने की खबर की पुष्टी कुछ
समाचार एजेसियों ने की है..
भगवान कोमलांगी को जल्द स्वास्थलाभ दे!
इसी बीच आम आदमी को आशा
की किरण यह जगी है कि
शायद सरकार इस
नाजुक कन्या और उनकी फैन मंडली
के दुःख को संज्ञान में लेते हुए
प्रभावी कदम उठाने में तेजी लाये....!
 

खैर आजकल मै एक अन्य
बीमारी से परेशान हूँ...
और मुझे पूरा यकीं है
की आप भी..
इस महाभयंकर और
महादुखदायी


‘’मच्छर फ्लू’’ नामक बीमारी
से अत्यधिक परेशान होंगे..
महाभयंकर मैंने इसलिये कहा क्युकी
आप स्वाइन फ्लू से तो बच
सकते हैं पर ‘’मच्छर फ्लू’’
से बचना नामुमकिन है...
और मच्छरफ्लू कहने से मेरा तात्पर्य
इसके और इससे होने वाले रोगों के 
सर्वत्र तेजी से फैलने  
के आशय से है...
ऐसा प्रकोप  है इसका कि
आप घर-आफ़िस
स्कूल-कालेज
रेलवे-स्टेशन बस-स्टेशन
अन्डर-ग्राउण्ड प्ले-ग्राउंड
 
कहीं भी चले जाये इससे मुक्ति नही है..
हद तो यह हो गयी है
की पहले आदमी तन को
कपड़ो से ढक के इनसे बच भी
जाता था..पर
हाय रे! क्रमिक विकास के इन योद्धाओं को 
बारम्बार प्रणाम! अल्प समय में ही क्या ख़ूब
प्रगति की है कि आप दो तीन स्तर के
के कपड़े ही क्यों न पहन लें..
उसके ऊपर से भी दंश गड़ाने में भी इनका कोई सानी नही!
तिस पर 'कोढ़ में खाज' वाली समस्या ये के
खुले स्थानों पर व्यक्ति खजुआ के परमसुख पा भी जाता था..
पर अब तो अपने ही व्यूह में फसने वाली स्थिति
हो गयी है...
अब सार्वजानिक स्थानों पे खुजली करने के स्थानों
की भी कोई सीमा होती है के नही ??
और तो और दंश के बाद की झुझलाहट की
जो स्थिति होती है के सामने वाले को
अकारण चमाट! कोई मार दे तो
इसमें कोई अजरज नही होना चाहिए...
दैनिक जीवन के ज़रूरी
कार्यो को करना अब तो किसी
जंग से कम नही रह गया है...
आपने तन से कपड़ा क्या उतारा
जैसे बौराई मधुमक्खियाँ
पीछे पड़ जाये ऐसा दृश्य हो जाता है..
नित्यकर्म करना दुश्वार कर रक्खा है..
मेरे पास शब्द नही है के मै कैसे इस
दुःख की अवस्था का वर्णन करूँ...

मच्चर भागाने और मारने के लिए
विभिन्न प्रकार की
सामग्री बाजार में उपलब्ध है..
ऐसे उत्पाद बनाने वाले की
सीजनल चाँदी होने का समय है..
लेकिन लोशन,लिक्विड,काइल,स्प्रे,आदि
में से कोई भी उपाय अब कारगर सिद्ध नही हो रहा..
इस आत्मघाती जीवट जीव ने
अपने को ऐसा बज्र मैकश बना लिया है के
हर एक डोज कम ही पड़ती जा रही है..
आप संख्या में रक्तबीज की भांति
मरने को हरपल तैयार और
रक्त का नमूना लेने को आतुर इस जीव का 
 कितना भी संहार क्यों न कर डाले
मुक्ति नही मिलने वाली...!
ये सच्चे जेहादी आज के दौर में
आतंकवाद की नई परिभाषा गढ़ रहें है!!



**इस सम्बन्ध में मेरा सरकार को मांग पत्र -------
१-      सभी कार्यालयों आफ़िस दफ्तरों में (सार्वजानिक व प्राइवेट समेत) मच्छरदानीयुक्त बैठकी का प्रबंध होना सुनिश्चित किया जाये!! अथवा आफिस मच्छरप्रूफ बनाना सुनिश्चित करे!
२-      मच्छरप्रूफ ट्रेनों व् बसों को पर्याप्त मात्रा में चलवाया जाये!
३-      मुफ्त मच्छरदानियों को बटवाया जाये!
४-      स्कूल कालेजों को मच्छरप्रूफ बनाने का प्रबंध करें!
५-      मच्छरप्रूफ विशेष प्रकार के कपड़ों का निर्माण की हर राज्य में इकाई का गठन किया जाये और मुफ़्त कपड़े बटवाया जाये!



अन्यथा आम जनता आने वाले समय में उग्र आन्दोलन करने पर विवश हो सकती है!!
यह मेरी स्पष्ट चेतावनी है!!



                                       - ''कृष्णा मिश्रा''

हे माँ शारदे!







मै भूखा हूँ
ज्ञान का ..
मुझे शब्दों का
आहार दो..
हे माँ शारदे!
अपने चरणों में
मुझे दुलार दो..




विचलित मन मेरा
यथा-व्यथा के
टंकारों से..
पतित न हो जाये
क्षणभंगुर अहंकारो से..
अपनी वीणा को
करो झंकृत माँ..
मन के अंधेरों से
मुझे उबार लो..

हे माँ शारदे!
अपने चरणों में
मुझे दुलार दो..





न तम में
मै भटकूँ..
न किसी की
निगाह में खटकूँ..
रक्खूँ सदा समदृष्टि
चाहे बरसे फ़ुहार
या हो मेघवृष्टि..
मुझे हृदय की
न्यूनता से तार दो..

हे माँ शारदे!
अपने चरणों में
मुझे दुलार दो..




जब भी लिखूँ
सच ही लिखूँ
मूक हो जाऊं
गर व्यर्थ मै बकूँ..
मेरी आवाज़ में सुधा
लेखनी में
गंगा का सार दो..
हे माँ शारदे!
अपने चरणों में
मुझे दुलार दो..





                                        -कृष्णा मिश्रा
                                        २७ फ़रवरी १५

योगदान देने वाला व्यक्ति